मुझे महसूस कर पाना इतना आसान होता तो
क्या नहीं हो सकता था
अगर हो भी जाता कुछ तो
क्या होता .....
और मुझे महसूस करने की तुम्हे ज़रुरत भी क्या थी
तुम आखों में डूबे रहे
बाँहों में फैले रहे
जुल्फों में अटके रहे
इस से ज़िआदा तुम थे ही नहीं
वो तो मैं तुम्हे अपनी आखें देती, तो तुम देख पाते
समंदर में सिर्फ पानी ही नहीं होता
कभी डुबकी लगा कर देखना
और वो
पानी की लहरों पे जो कश्तीयें चलती हैं न
वो
सफ़र होती हैं
कभी न ख़तम होने वाला सफ़र
न तुम पानी पे चल सके न डुबकी लगा सके
अगर चलते भी तो क्या होता ........
होना ही तो सब कुछ नहीं होता

क्या नहीं हो सकता था
अगर हो भी जाता कुछ तो
क्या होता .....
और मुझे महसूस करने की तुम्हे ज़रुरत भी क्या थी
तुम आखों में डूबे रहे
बाँहों में फैले रहे
जुल्फों में अटके रहे
इस से ज़िआदा तुम थे ही नहीं
वो तो मैं तुम्हे अपनी आखें देती, तो तुम देख पाते
समंदर में सिर्फ पानी ही नहीं होता
कभी डुबकी लगा कर देखना
और वो
पानी की लहरों पे जो कश्तीयें चलती हैं न
वो
सफ़र होती हैं
कभी न ख़तम होने वाला सफ़र
न तुम पानी पे चल सके न डुबकी लगा सके
अगर चलते भी तो क्या होता ........
होना ही तो सब कुछ नहीं होता


