Monday, 26 March 2012

वजूद

 मुझे महसूस कर पाना इतना आसान होता तो
क्या नहीं हो सकता था
अगर हो भी जाता कुछ तो
क्या होता .....
और  मुझे महसूस करने  की तुम्हे ज़रुरत भी क्या थी
तुम आखों में डूबे रहे
बाँहों में फैले रहे
जुल्फों में अटके रहे
इस से ज़िआदा तुम थे ही नहीं
वो तो मैं तुम्हे अपनी आखें देती, तो तुम देख पाते
समंदर में सिर्फ पानी ही नहीं होता
कभी डुबकी लगा कर देखना
और वो
पानी की लहरों पे जो कश्तीयें चलती हैं न
वो
सफ़र होती हैं
कभी न ख़तम होने वाला सफ़र
न तुम पानी पे चल सके न डुबकी लगा सके
अगर चलते भी तो क्या होता ........
होना ही तो सब कुछ नहीं होता

अपना अपना चाँद

यूँ तो मैं कभी उदास नहीं होती
मगर इन्सान हूँ...
 एक जैसी  नहीं रहती ...
जब कभी ऐसा  हुआ
सूरज की  छोटी  सी चिंगारी
रूह  में भर के
बदन का रथ चाँद की और मोड़ दिया
रथ ने रफ़्तार भी कहाँ पकड़ी थी
कि पेड़ों से पत्ते झरने लगे
हवा फुंकारने लगी
बादल  ने भी रूप बदला
अँधेरे ने  रास्ता भर दिया
मैंने कांपते हाथों से रथ कि रस्सियाँ खींच दीं
पेड़ ,हवा, बादल ...अँधेरा ....सब चुप .....
मैंने रूह कि पोटली टटोली
जो हाथ में आया
उसे गूंधा ...बेला....
और एक ......
..............एक चाँद पकाया
बदन का रथ रोज़ उस से मिलने जाता है
पेड़ ,हवा, बादल ...अँधेरा ....सब चुप ....
तुम सब भी टटोलो पोटलियाँ ....
फिर कोई उदास नहीं होगा
यूँ तो मैं  भी कभी उदास नहीं होती.......

Wednesday, 14 March 2012

वही नाटक

आधी रात का समय
नाटक अब भी जारी है
कैसा नाटक है .........
न अभिनेता बदलता
न अभिनेत्री  बदलती
कहानी भी लगभग वही
सब ठहाके लगा कर रो रहे हैं ....
मैं  और मेरा  दोस्त
परदे के पीछे देखना चाहते हैं
मुमकिन नहीं है ....
अब  हम चोरी करेंगे
ताकि कुछ तो बदल सकें
यूँ कब तक चलेगा
वही नाटक
वही नाटक
वही नाटक ....


Sunday, 11 March 2012

खोज का सफ़र



ऐ दोस्त
तुने क्यूँ  चुना
खुद को खुदकशी के लिये
एक ज़ज्बे के लिए ठीक नहीं होता यूँ कतल हो जाना
एक ही नाटक में कितनी बार मरोगे
आखिर कितनी बार
रिश्तों को बचाते बचाते
खुद को न बचा पायोगे
सिर्फ रिश्ता होगा
खुदकशी के धरातल पर बना   रिश्ता
अपने आप को तोड  कर
क्या तामीर कर रहे हो,
इमारतें  ऐसे  नहीं बनती,
बस करो अब ...
बंद करो यह नाटक ...
कुछ मत बदलो ..
बस ...
शुरू करो अपनी खोज का सफ़र
ज़िन्दगी  लम्बी कहानी का नाम नहीं है
भूल जायो किताबों की बातें
खुद से प्यार करो
यही से शुरू होगा ....
खोज का सफ़र

Saturday, 10 March 2012

अबके  मैं  तुम्हे  मिलू
 तो
मुझे अपनी  चिलम में भर लेना
तुम्हारी सांसों से राख होना चाहती हूँ...

!!!

ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਖੁਸ਼ ਹਾਂ
ਤੇ
ਅਮੀਰ ਵੀ ਬਹੁਤ
ਸਚਮੁੱਚ ਮੈਂ ਪਲਾਂ'ਚ ਜੀਣਾ ਸਿਖ ਲਿਆ..

!!

आज पूरे चाँद की रात होगी ,
तुम तो जानते हो

हो सके तो मिलने आ जाना..
रंग बिरंगे  चाँद  से खेलेंगे
बहुत शरारती हो गये हो तुम
चाँद के सब रंग ले भागे हो.....
माँ पूछेगी तो क्या जवाब दोगे
कुरते के रंग तो छूट जाएँगे
बाहों में जो भरके भागे थे उन का क्या करोगे
आओ मैं   तुम्हे चांदनी से धो दूँ
खेल खेल में सब चलता है ...

आज पूरे चाँद की रात होगी ,
तुम तो जानते हो....

!

ਨਾਲਿਆਂ ਦੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਤਿ੍ਪਤ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਅਸੀਂ,ਈਹ ਜਾਣ ਹੀ ਨਹੀਂ ਸਕੇ...
ਕਿ
ਪਿਆਰ ਦੀ ਝੀਲ'ਚ ਹੰਸ ਬਣ ਲਹਿੰਦੇ
ਤਾਂ,ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਪੰਡ ਬੰਨ ਸਕਦੇ ਸਾਂ

तुम जब भी मिलो

मैं चाहती हूँ कि तुम जब भी मिलो खुल के मिलो
मैं चाहती हूँ कि तुम जब भी मिलो डूब के मिलो
मैं चाहती हूँ कि तुम जब भी मिलो जिन्दा मिलो
मैं चाहती हूँ कि तुम जब भी मिलो,बस मिल लो
मैं चाहती हूँ कि तुम जब भी बिछुड़o ,,मिल के बिछुड़o