Monday, 11 June 2012

ज़िन्दगी एक रंगीन चलचित्र

by Preet Paul Hundal on Thursday, May 17, 2012 at 8:03pm ·
ज़िन्दगी एक रंगीन चलचित्र  की मानिंद शुरू होती है ----
संगीत ,सुंदर नज़ारे ,मुहबत भरी बातें  वगैरा वगैरा------
फिर धीरे धीरे हम घिसने लगते हैं
चलचित्र के रंग उड़ने लगते हैं
लफ्ज़ बीमार नायक की तरह साथ छोड़ने लगते हैं
हर किरदार पे एक चुप्पी छाने लगती है ,
चुप्पी में हम महफूज़ रहते हैं
हमें इससे  प्यार हो जाता है
फिर व्ही प्यार  कैदगाह लगने लगता है
हम चीखते हैं  बाहर निकलने के लिए
  कैदगाह जकडत है बाहों में
निगाहों में ......
हम और जोर से चीखते हैं .......
बच्चे  कह रहे हैं शोर बंद करो
हम मुंह पे हाथ रख लेते हैं ...
 चीख हवा  बन कर उँगलियों में से सरकती है
और हंसी का फुवारा बन  जाती है ....
कैरम में मन लगाते हैं
नन्हे से जोक पे ठहाका लगाते हैं
बच्चों को नाटक कर के दिखाते हैं
बहुत बड़े अभिनेता हो गए हैं अब
चलचित्र का संगीत संजीदा हो गया है
वक़्त बहुत कम है जीने के लिए.......

No comments:

Post a Comment