Saturday, 7 April 2012

तू खुदा ढूँढने मत जा ,

तू खुदा ढूँढने मत जा ,
मैं मोहब्बत कर रही हु ...

तुझे बताना जरूरी हो गया है ,
तू ही तो खुदा है ,
तुझसे पूछना जरूरी हो गया है .
तुम भूल कैसे गए ?

धर्म की आयते सारी ,
तुम्हारे अन्दर से तो ,
गुजरती है ....

लोग खुदा को ढूँढ़ते , बावरे है ,
मै खुदा को देखती , बावरी हु ....

मै तेरी कुदरत हु ,
तू मुझे देखता रह ,
मै ऐसे ही सींची जाती हु ...

ऐसे ही मेरे फूल और पत्तो में ,
साँस झरते है ,

इस तरह मैं और और फैलती हु ,
इस तरह ही तू और और ,
खुदा होता जा......
-----neeru aseem

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