Saturday, 7 April 2012

मुझे मेरे शब्दों में मत ढूंढना

मुझे मेरे शब्दों में मत ढूंढना
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मुझे मेरे शब्दों में मत ढूंढना
न ढूंढना मेरे शब्दों को उनके अर्थ में
मत ढूंढना मुझे विन्यास में
न कला की लंबी यात्राओं में
न किताबों में दर्ज इबारतों में.

मुझे मेरे होने में मत ढूंढना
मत ढूंढना मेरे नाम में
न ही मेरे चेहरे में
न कविताओं में, न कहानियों में
न रूदन में, न खिलखिलाहटों में

मत ढूंढना मुझे इतिहास की पगडंडियों में
न ख्याल में, न बंदिश में, न ध्रुपद में
न ढूंढना मुझे आग में, न पानी में
न किसी किस्सा-ए-राजा रानी में,

मुझे ढूंढना तलाशना होगा खुद को
छूना होगा अपनी ही रूह को
मांजना होगा अपना ही व्यक्तित्व,
बेदम होती आशाओं पर
रखना होगा उम्मीद का मरहम
उगानी होगी खिलखिलाहटों की फसल ,

तमाम वाद, विवाद से परे
लिखे-पढ़े से बहुत दूर
कहे सुने को छोड़कर किसी निर्जन स्थल पर
किसी रोज मुझे ढूंढना अपने ही भीतर
मुझे मेरे शब्दों में मत ढूंढना...
--------- Pratibha Katiyar

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