Saturday, 7 April 2012

पत्थरों के भीतर ,
छोड़ दो हमारे सिहरते शरीर,
आत्मा अपने आप जन्म लेगी ,
जैसे वह आग ,
जिसे हमने पैदा किया था ,
जब वहा दो पत्थर थे ...
---- मंगलेश डबराल

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